" क्या कांग्रेस टीम सोनिया गांधी और टीम राहुल गांधी के बीच फस गई है ?
कांग्रेस राजनीतिक रूप से बुरे दौर से गुजर रही है ? यह सब जानते हैं और बतिया भी रहे हैं की कांग्रेस अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है, कांग्रेस का बुरा दौर तो इससे पहले भी कई बार आया था, मगर वह दोर कुछ और था यह दोर कुछ और है !
क्योंकि मौजूदा दौर में कांग्रेस को केंद्र की सत्ता से बाहर हुए लंबा समय हो गया है, इतना लंबा समय सत्ता के बाहर कांग्रेस में पहले कभी नहीं देखा था, और ना ही कांग्रेस के अलावा किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत और प्रचंड बहुमत के साथ लगातार केंद्र में सरकार बनाते हुए नहीं देखा था !
ऐसा भी नहीं है की देश में गैर कांग्रेसी सरकारें नहीं बनी, देश में गैर कांग्रेसी सरकारें बनी थी लेकिन सरकार गठजोड़ से बनी थी जो पूर्ण रूप से स्थिर नहीं थी, और गठजोड़ सरकारों का हर्ष भी बुरा हुआ सरकार या तो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई या एक बार से दूसरी बार लगातार सरकार नहीं बन पाई ! पहली बार 2014 में भा जा पा को गठबंधन के बाद भी पूर्ण बहुमत मिला और 2019 में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला और लगातार भाजपा की देश में दूसरी बार सरकार बनी ! इसलिए कांग्रेस के संदर्भ में कह सकते हैं कि वह दो र और था यह दोर ओर हे !
उस दौर में कांग्रेस के पास एक मजबूत नेतृत्व था, जो कांग्रेस को एकजुट रखता था और बुरे दौर को अच्छे दौर में तब्दील करता था ! श्रीमती इंदिरा गांधी और श्रीमती सोनिया गांधी दोनों ने कांग्रेस के बुरे दिन देखे लेकिन दोनों ने ही कांग्रेस को बुरे दिनों से उभरा और कांग्रेस को मजबूत किया ! लेकिन मौजूदा वक्त में क्या कॉन्ग्रेस टीम सोनिया गांधी और टीम राहुल गांधी के बीच में फंस गई है ? यह सबसे बड़ा सवाल है, राज्य दर राज्य कांग्रेस के भीतर जो आंतरिक कलह दिखाई दे रहा है क्या वह कलह टीम सोनिया गांधी और टीम राहुल गांधी का परिणाम है ? कॉन्ग्रेस उम्र दराज और युवा जोश के बीच में फंसी हुई है क्या ? कांग्रेस के उम्र दराज नेता टीम सोनिया गांधी के साथ में तो वही युवा नेता राहुल गांधी के साथ ! क्या उम्र दराज नेता और युवा नेता दोनों अपनी अपनी राजनैतिक महत्व आकांक्षा को लेकर राजनीतिक संघर्ष कर रहे हैं और क्या यही कॉन्ग्रेस के बुरे दौर की असली जड़ है !
कांग्रेस के जो नेता आज कांग्रेस के पूर्ण कालीन अध्यक्ष की बात और मांग कर रहे हैं क्या उन नेताओं ने ही श्रीमती सोनिया गांधी को लंबे समय तक कांग्रेस का अध्यक्ष बनाकर नहीं रखा था और श्रीमती सोनिया गांधी के बाद जब राहुल गांधी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने उसके बाद राहुल गांधी को बीच में ही अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना क्यों पड़ा और जो नेता आज कांग्रेस के स्थाई अध्यक्ष की मांग कर रहे हैं उन नेताओं ने श्रीमती सोनिया गांधी को कार्यकारी अध्यक्ष क्यों बनाया और वह नेता कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को बार-बार क्यो टलते रहे और क्यों सोनिया गांधी को इसकी जिम्मेदारी देते रहे, क्योंकि उन नेताओं को सोनिया गांधी सूट करती हैं, राहुल गांधी नहीं ?
कांग्रेस को बुरे दौर से उभारने का दायित्व अकेले राहुल गांधी के कंधे पर नहीं है यह फर्ज उन नेताओं का भी है जिन्होंने लंबे समय तक कांग्रेस की सत्ता में रहकर मलाई खाई है ! आज कांग्रेस का बुरा दौर भी मलाईदार नेताओं के कारण ही दिखाई दे रहा है, जहां तक राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की बात करें तो दोनों ही नेता लंबे समय से कांग्रेस को बुरे दौर से निकालने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं लेकिन जो नेता नेतृत्व पर अंगुली उठा रहे हैं वह नेता दरअसल कांग्रेस को कमजोर कर रहे हैं !
अंत में एक शेर अर्ज किया है
हमें तो अपनों ने मारा है दूसरों में कहां दम था !
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