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Thursday, September 9, 2021

9/09/2021 11:01:00 AM

सचिन पायलट और राजस्थान की राजनीति ! पहले से अधिक मजबूत दिखाई दे रहे हैं सचिन पायलट ?



●Devendra Yadav●

कहावत है, ईश्वर जो भी करता है भले के लिए ही करता है ? शायद यह कहावत राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट के लिए सही बैठती है ! यदि 2018 मैं सचिन पायलट राज्य के मुख्यमंत्री बन जाते तो, उनको अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता पहली चुनौती तो बहुमत को लेकर आती क्योंकि कांग्रेस के पास विधानसभा में अपनी मात्र 100 सीटें थी, ऐसे में स्थाई रूप से सरकार चलाने के लिए कांग्रेस को 100 से अधिक सीटें चाहिए थी क्या सचिन पायलट निर्दलीय और बहुजन समाज पार्टी के विधायकों का समर्थन हासिल कर लेते यह एक बड़ी चुनौती थी ! क्या सचिन पायलट भाजपा के ऑपरेशन कमल की चुनौती का सामना का सामना कर लेते यह दूसरी चुनौती थी ! और आज जेसी चुनौती सचिन पायलट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दे रहे हैं वैसी ही चुनौती अशोक गहलोत की तरफ से सचिन पायलट को मिलती क्या सचिन पायलट अशोक गहलोत की चुनौती का सामना कर लेते यह तीसरी चुनौती होती ! यदि मध्य प्रदेश को स्मरण करें तो सचिन पायलट के लिए यह तीनों ही चुनौतियां बड़ी थी जिनका सामना शायद पायलट नहीं कर पाते यह कटु सत्य है क्योंकि राजनीति के मजे मजाय खिलाड़ी कांग्रेस के कद्दावर नेता कमलनाथ को मध्यप्रदेश में अपनी सरकार को गवाते हुए देखा है ! 

सचिन पायलट और उनके समर्थक नेताओं को इस बात का मलाल है की पायलट अशोक गहलोत की जगह मुख्यमंत्री नहीं बने, भले ही सचिन पायलट राज्य के मुख्यमंत्री नहीं बने लेकिन इस दौर में सचिन पायलट की राजनीतिक ताकत और हैसियत पहले से अधिक बड़ी है ! सचिन पायलट प्रदेश की आने वाली राजनीति के एक मात्र प्रभावशाली नेता बनकर सामने आए हैं, प्रदेश में आने वाले समय में पायलट के बराबर का कद्दावर नेता ना तो सत्तारूढ़ कांग्रेस मैं दिखाई दे रहा है और ना ही भा जा पा में ! प्रदेश भाजपा में अंदरुनी राजनीतिक हालात ठीक नहीं है, भाजपा के अंदर नेतृत्व को लेकर विवाद जारी है, पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के अलावा अन्य कोई नेता अभी भाजपा में नजर भी नहीं आ रहा है क्यों वसुंधरा को चुनौती दे !

सचिन पायलट को लेकर राजनीतिक गलियारों में एक भ्रम यह भी था की पायलट गुर्जरों के नेता है, लेकिन यह भ्रम भी टूट गया पायलट के साथ प्रदेश के जाट आदिवासी मीणा राजपूत दलित ब्राह्मण सहित 36 कॉम साथ में खड़ी दिखाई दे रही है !

कांग्रेस के लिए मौजूदा वक्त में सबसे बड़ा फायदा जाट और राजपूत से होता दिखाई दे रहा है इन जातियों के नेताओं को सचिन पायलट इस दौर में एकजुट करने में सक्षम रहे हैं, जबकि यह जातियां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से ज्यादा खुश दिखाई नहीं दे रही थी अब यह जातियां सचिन पायलट के साथ खड़ी दिखाई दे रही है जो कांग्रेस के भविष्य के लिए ठीक है ! यदि पिछले 6 महीने का राजनीतिक आकलन करें तो सचिन पायलट की राजनीतिक ताकत पहले से अधिक बड़ी है प्रदेश की जनता पायलट को भविष्य का नेता मान रही है ऐसे में कॉन्ग्रेस सचिन पायलट के नेतृत्व में 2023 में विधानसभा का लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर इतिहास रचेगी ? इसका अभी इंतजार करना होगा लेकिन सचिन पायलट के 44 वे जन्मदिन पर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के द्वारा दी गई बधाई से लगता है, सचिन पायलट का आने वाला राजनीतिक भविष्य उज्जवल है !


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