कोयला संकट : राजनीतिक दलों पर छाया मुफ्त बिजली देने का वादा करने पर संकट ?
●●Devendra Yadav●●>
चुनावी मौसम में देश के राजनीतिक दल, मतदाताओं को लुभाने के लिए चुनाव के वक्त अनेक प्रकार की लोकलुभावन घोषणाएं करते हैं, कुछ घोषणाएं तो राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्र और संकल्प पत्र में भी शामिल करते हैं ! यदि पिछले एक दशक में राजनैतिक दलो की चुनावी घोषणा की बात करें तो, प्रमुख घोषणा मुफ्त पानी और बिजली की घोषणा है क्योंकि इस घोषणा ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी की एक बार नहीं बल्कि लगातार दूसरी बार आम आदमी पार्टी की सरकार बनाई थी !
आम आदमी पार्टी इस घोषणा के साथ दिल्ली से निकलकर देश के अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी अपने पैर पसारती हुई नजर आ रही है गोवा उत्तराखंड पंजाब और उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव में आम आदमी पार्टी मुफ्त बिजली और पानी देने के वादे के साथ चुनावी मैदान में उतरने का प्लान बना रही है ! कांग्रेस भी पंजाब में मुफ्त बिजली देने और मौजूदा वक्त में बिजली के बिल माफ करने की घोषणा कर चुकी है !
देश में विगत दिनों से कोयला संकट को लेकर बड़ी चर्चा चल रही है, चर्चा कोयला संकट के कारण बिजली संकट उत्पन्न होने की भी चल रही है ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या राजनीतिक दल कुछ समय बाद संपन्न होने वाले विधानसभा चुनाव में अपने वादे मुफ्त बिजली और पानी देने पर कायम रहेंगे ? या फिर अपने वादे मैं बदलाव करेंगे ? क्योंकि आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस सरकार के सामने दिल्ली और पंजाब में कोयले के संकट के कारण बिजली का संकट खड़ा हो गया है, ऐसे में जब रेगुलर बिजली देने का संकट सामने खड़ा है तब यह पार्टियां जनता को मुफ्त बिजली देने का वादा कैसे कर पाएंगे जबकि संकट की संभावना तो यह बन रही है कि कोयले के कारण बिजली पर संकट खड़ा हो रहा है ऐसे में रेगुलर बिजली देने के भी लाले पड़ते नजर आ रहे हैं ?
राज्य और केंद्र दोनों की ताकत क्या होती है यह पिछले 7 साल में देश की जनता को पहली बार पता चला कोरोना महामारी, पेट्रोल डीजल और रसोई गैस के बाद कोयला संकट भी राज्य और केंद्र के बीच में फंसता नजर आ रहा है ! कोरोना महामारी के समय केंद्र राज्य पर और राज्य केंद्र पर सवाल खड़े करते हुए नजर आया वही पेट्रोल डीजल और रसोई गैस की कीमतों में सरकारी टैक्स के कारण बढ़ोतरी होने पर भी यही बात सुनाई देती है कि राज्य सरकार अधिक टैक्स ले रही है तो वही राज्य सरकारें आरोप लगाती है कि केंद्र सरकार अधिक एक्साइज ड्यूटी ले रही है अब कोयले को लेकर भी राज्य और केंद्र दोनों आमने सामने दिखाई दे रहे हैं ! क्या कोरोना महामारी और पेट्रोल डीजल और रसोई गैस की तरह कोयला संकट भी राज्य और केंद्र के बीच में फस कर रह जाएगा ? जहां तक कोयला संकट की बात है केंद्र सरकार के कोयला मंत्री बता चुके हैं कि देश में कोयले का बिल्कुल भी संकट नहीं है कोयला पर्याप्त मात्रा में है, कोयला खदानों में बरसात के कारण पानी भरा हुआ है शीघ्र ही कोयला खदानों में कोयले का प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा, केंद्र सरकार इसके लिए भरसक प्रयास कर रही है !
Devendra Yadav Sr. Journalist |
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