राजस्थान सरकार का एक और कदम,
डेंगू मुक्त राजस्थान !
●Devendra Yadav●
कोविड-19 की बीमारी की रोकथाम के लिए दुनिया भर में प्रबंधन और उपचार को लेकर चर्चा में रहे राजस्थान की सरकार और राज्य के मुख्यमंत्री पूर्व चिकित्सा मंत्री अशोक गहलोत रघु शर्मा एक बार फिर से प्रदेश भर में मौसमी बीमारियों के कुशल प्रबंधन और उपचार को लेकर प्रदेश भर में चर्चा का केंद्र बन गए हैं !
चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि प्रदेश भर में मौसमी बीमारियों ने जिस तेजी के साथ अपने पैर पसारे उसी तेजी के साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने स्वयं मॉनिटरिंग कर मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए बेहतर प्रबंधन किया है ! प्रबंधन के तहत राज्य स्तर के अधिकारियों की टीम तैयार कर प्रत्येक जिलों में भेजी है, वही स्वास्थ्य कर्मियों और कुशल कार्यकर्ताओं की टीम बनाई है जो घर घर जाकर सर्वे कर पता लगाई थी की किस व्यक्ति को मौसमी बीमारी है यही नहीं राज्य सरकार ने बीमारी का पता लगाने और घर पर जाकर मरीज का उपचार करने का भी प्रबंधन किया है मरीज की टेस्टिंग और दवाई तक घर पर जाकर मरीज को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है व्यवस्था तेजी के साथ की जा रही है !
डेंगू मुक्त राजस्थान का संकल्प लेकर अशोक गहलोत सरकार ने एक बार फिर से राज्य में स्वास्थ्य को लेकर बड़ा कदम उठाया है जिसकी चर्चा जोरों पर है !
जहां तक स्वास्थ्य कर्मियों का जिक्र करें तो स्वास्थ्य कर्मियों ने कोरोना महामारी के समय भी मुस्तैदी और ईमानदारी के साथ काम किया था इसीलिए सारी दुनिया में राजस्थान सरकार के बेहतर प्रबंधन और उपचार की चर्चा हुई थी ! राजस्थान में सरकार के द्वारा किए गए प्रबंधन और बीमारी के उपचार की चर्चा राजस्थान के बेहतर चिकित्सकों के कारण भी रही !
इस चर्चा राजस्थान के निजी अस्पताल भी आगे रहे, जहां तक निजी अस्पतालों की बात करें तो कोविड-19 के दूसरे चरण में राजस्थान की राजधानी जयपुर के एटरनल अस्पताल की चर्चा खासी रही चर्चा इस अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर कृष्ण कुमार शर्मा की खासी चर्चा रही, जिन्होंने कोरोना महामारी के दूसरे चरण में डेल्टा वेरिएंट के मरीजों का बेहतर उपचार कर जान बचाई !
डॉक्टर के के शर्मा चेस्ट विशेषज्ञ होने के बाद आज उन्हें प्रदेश की जनता कोरोना स्पेशलिस्ट के रूप में जानती है और चर्चा करती है !
देशभर में कोरोना महामारी के दूसरे चरण में जनता एक-एक सांस के लिए तड़प रही थी उस समय डॉक्टर के के शर्मा अपनी लगन डेडीकेशन के माध्यम से मरीजों को भरोसा और विश्वास दिलाते हुए उपचार कर रहे थे और मरीजों की जान बचा रहे थे !
कोटा स्थित संभागीय अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर राजेश सागर कोरोना महामारी में अपने पिता माता और भाई को खोने के बाद स्वयं कोरोना महामारी की चपेट में ऐसे आए कि उन्हें भी चिकित्सकों ने अंतिम जवाब दे दिया था तब डॉक्टर सागर के परिवार जन उन्हें लेकर एटरनल अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टर के.के. शर्मा ने उनका उपचार शुरू किया और डॉक्टर सागर ठीक होकर अपने घर पहुंचे, ऐसे अनेक मरीज हैं जिन्हें के.के. शर्मा ने उपचार और डेडीकेशन के माध्यम से ठीक किया और इसीलिए डॉक्टर के.के. शर्मा प्रदेश भर में चेस्ट स्पेशलिस्ट होने के बाद भी जनता की नजर में कोरोना स्पेशलिस्ट बन गए !
लेकिन एक सवाल जनता के बीच खड़ा है कोरोना महामारी के समय जिन चिकित्सकों और कर्मियों ने बेहतर काम किया क्या उन्हें केंद्र और राज्य स्तर पर सम्मान नहीं मिलना चाहिए ?
क्या केंद्र और राज्य सरकारों को एक ईमानदार सर्वे करा कर डॉक्टर के के शर्मा जैसे होनहार चिकित्सकों का पता लगा कर उन्हें सम्मानित नहीं करना चाहिए? यह सवाल अभी भी जस के तस बने हुए हैं जबकि चिकित्सक और चिकित्सा कर्मी अभी भी कोरोना और मौसमी बीमारियों के उपचार में पूर्ण ईमानदारी के साथ लगे हुए हैं !
Devendra Yadav Sr. Journalist |
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