राजस्थान की राजनीति :
इतना सन्नाटा क्यों है भाई ?
Devender Yadav
राजस्थान की राजनीति की बात करें तो2018 मैं भारतीय जनता पार्टी की हार और कांग्रेस की जीत के बाद से ही भाजपा और कॉन्ग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर विवाद चला, दोनों ही प्रमुख पार्टियों के भीतर अंदरूनी विवाद किसी पानी के बुलबुले से कम नहीं था ! जिस प्रकार से बुलबुला अचानक नजर आता है और एक विस्तार के बाद अचानक खत्म हो जाता है ! कुछ इसी तरह का नजारा 2018 से लेकर अब तक राजस्थान की राजनीति में दिखाई दे रहा है ! भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के भीतर एक ही प्रकार की समस्या है ! भाजपा में पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के नेतृत्व को लेकर, एक पक्ष को लेकर नाराजगी है तो वही कांग्रेस के भीतर भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लेकर एक पक्ष में नाराजगी है ! कभी नाराजगी पानी के बुलबुले की तरह तेज हो जाती है तो कभी राजनीतिक बुलबुला विस्तार लेकर खत्म हो जाता है !
कांग्रेस और भा जा पा मैं फर्क सिर्फ इतना है की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से पार्टी हाईकमान नाराज नहीं है जबकि भाजपा में श्रीमती वसुंधरा राजे से हाईकमान की नाराजगी दिखाई देती है ! जहां तक अशोक गहलोत की उच्च स्तर पर राजनीतिक पकड़ की बात करें तो, आज भी अशोक गहलोत की पकड़ मजबूत दिखाई पड़ती है !
इसका सबसे बड़ा राजनीतिक प्रमाण डॉ रघु शर्मा और हरीश चौधरी हैं जिन्हें हाईकमान ने गुजरात और पंजाब राज्य का प्रभारी बनाया है, शर्मा और चौधरी दोनों ही गहलोत के खास सिपहसालार हैं, इन दोनों ही नेताओं को अशोक गहलोत राजनीति में लेकर आए थे और यह दोनों ही नेता अशोक गहलोत की छत्रछाया में राजनीति में पले बढ़े हुए हैं !
पंजाब कांग्रेस मैं सत्ता और संगठन के बदलाव के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया था की शीघ्र ही राजस्थान में भी पंजाब की तर्ज पर बदलाव होगा, कुछ दिन तक चर्चा का जोर रहा लेकिन उसके बाद चर्चा पानी के बुलबुले की तरह खत्म हो गई और अब राजस्थान में राजनीतिक सन्नाटा सा पसरा हुआ है, अब किसी भी तरह के बदलाव की चर्चा सुनाई नहीं दे रही है ! इसके अनेक राजनीतिक कारण हो सकते हैं !
पंजाब के बाद राजस्थान को लेकर शायद इसलिए भी चर्चा को बल मिला क्योंकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अस्वस्थ थे और वह डॉक्टरों की सलाह पर घर से बाहर नहीं निकल रहे थे लेकिन अब गहलोत स्वस्थ हैं और घर से बाहर भी निकल रहे हैं वह सीडब्ल्यूसी की बैठक में भाग लेने के लिए दिल्ली भी गए !
राजस्थान में विधानसभा के दो स्थानों पर उपचुनाव हो रहे हैं, एक कारण यह भी है !
राजस्थान में मौसमी बीमारियों ने अपने पैर पसार रखे हैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में डेंगू मुक्त राजस्थान का अभियान चला रखा है ! जिस प्रकार से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना महामारी दौर मैं प्रदेश की जनता को बेहतर उपचार और व्यवस्था मुहैया कराई थी ठीक वैसे ही डेंगू मुक्त राजस्थान अभियान के तहत भी अशोक गहलोत ने प्रदेश में माकूल प्रबंधन किया है ! राज्य में दो स्थानों पर हो रहे उपचुनाव के बाद क्या फिर से राजनीतिक बुलबुला उड़ता हुआ नजर आएगा या फिर बुलबुला स्थाई रूप से शांत दिखाई देगा शांत होने की संभावना कम नजर आ रही है क्योंकि अब राज्य मैं जैसे-जैसे दिल गुजर रहे हैं वैसे वैसे विधानसभा के आम चुनाव नजदीक आते दिखाई दे रहे हैं ऐसे में दोनों ही पार्टियों के भीतर नए नेतृत्व को लेकर आवाज तो सुनाई देगी ही, बस इंतजार यह है कि दोनों ही पार्टियों के भीतर नए नेतृत्व का आगाज होगा या नहीं इसका भी इंतजार करना होगा ?
Devendra Yadav Sr. Journalist |
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