3 लोकसभा और 29 विधानसभा के उपचुनाव के परिणाम घोषित !
【 Devendra Yadav 】
2 नवंबर मंगलवार को देश के विभिन्न राज्यों मैं संपन्न हुए विधानसभा के उपचुनाव के रिजल्ट की घोषणा, के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक राजनीतिक पंडित और राजनेता टीवी चैनलों पर बैठ कर ऐसे बहस और समीक्षा करने लगे जैसे यह उपचुनाव नहीं बल्कि लोकसभा और विधानसभा के आम चुनाव हो ? उपचुनाव के परिणाम, सत्ता धारी पार्टी के अनुरूप आते हुए दिखाई दिए, जहां जिस पार्टी की सरकार है परिणाम भी उसी पार्टी के अनुरूप आए मगर हिमाचल प्रदेश में चुनाव परिणाम सत्ता पक्ष के एकदम विपरीत आए, हिमाचल प्रदेश के परिणाम में राजनीतिक पंडित विश्लेषक और राजनेताओं को बहस और समीक्षा करने का अवसर दे दिया ! हिमाचल प्रदेश मैं संपन्न हुए एक लोक सभा और 3 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की ! हिमाचल मैं भाजपा की सरकार है ! कॉन्ग्रेस के लिए मौजूदा वक्त में हिमाचल प्रदेश की जीत एक बड़ी जीत है इसके अलावा राजस्थान में भी कांग्रेस ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की, राजस्थान में कांग्रेस की जीत इसलिए मायने रखती है क्योंकि भा जा पा वहां बुरी तरह से चुनाव हारी है भाजपा राजस्थान में जमानत भी नहीं बचा पाई बल्कि भाजपा के उम्मीदवार तीसरे और चौथे स्थान पर रहे हैं ! बिहार उपचुनाव में लंबे समय बाद लालू प्रसाद यादव की एंट्री के बाद लग रहा था कि आरजेडी जीत दर्ज करेगी मगर आरजेडी दोनों विधानसभा सीटों पर चुनाव हार गई !
तीन लोक सभा और 29 विधानसभा के उपचुनाव के परिणाम की बात करें तो, यह चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए शुभ संदेश लेकर आया है, इसलिए क्योंकि कांग्रेस पर भाजपा ही नहीं बल्कि विपक्ष के नेता भी कमजोर होने का आरोप लगा रहे थे ! इस चुनाव में कांग्रेस ने राजस्थान में सत्ता में होने के बाद और हिमाचल में सत्ता से बाहर रहते हुए विधानसभा और लोकसभा की सीट जीती, मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस ने विधानसभा की 1 सीट जीती जहां भाजपा की सरकार है !
कांग्रेस ने एक लोक सभा और आठ विधानसभा की सीट जीतकर अपने विरोधियों को बता दिया कि कांग्रेस आज भी मजबूत है और सारे देश में मौजूद है !
जो विपक्ष के नेता दबी जुबान कांग्रेस को भाजपा का विकल्प नहीं मान रहे थे, वह नेता भी अब शायद बयान देने से बचेंगे, और यह ताकत कांग्रेस को हिमाचल प्रदेश की जनता ने दी है जहां कांग्रेस सत्ता से बाहर रहने के बाद भी एक लोक सभा और 3 विधानसभा की सीटें जीती है !
हिमाचल की जीत में राष्ट्रीय प्रभारी राजीव शुक्ला का बड़ा योगदान रहा जिन्होंने राजनीतिक सूझबूझ और रणनीति के तहत कांग्रेस के उम्मीदवार मैदान में उतारे, यदि कांग्रेस ऐसी ही रणनीति मध्यप्रदेश में भी बनाती तो शायद कॉन्ग्रेस खंडवा लोकसभा की सीट भी जीत जाती! कुल मिलाकर उपचुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन राजनीतिक पंडितों और विश्लेषकों और मीडिया के लिए समीक्षा करने के लिए चुनौती बन गया है क्योंकि इन्हीं गलियारों से कांग्रेस को लेकर आवाज आती सुनाई देती है कि भाजपा का विकल्प कमजोर कांग्रेस कैसे हो सकती है ?
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