विपक्ष का लक्ष्य क्या है ? भाजपा को हटाना या कांग्रेस को कमजोर करना ?
देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी पार्टियों की तैयारियों को देख और सुन कर शायद राजनीतिक पंडित भी भ्रमित हो रहे होंगे की, विपक्षी पार्टियों का लक्ष्य भाजपा को हराना है, या फिर कांग्रेस को कमजोर करना है ?
यदि 2021 में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो, उस चुनाव मे तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा को बंगाल की सत्ता पर काबिज नहीं होने दिया और तीसरी बार तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई, मगर पश्चिम बंगाल में हार के बाद भी भाजपा मजबूत नजर आई वहीं देश की सबसे पुरानी पार्टी कॉन्ग्रेस खत्म हो गई उसे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली !
पश्चिम बंगाल के बाद 2022 में देश के पांच राज्यों में फरवरी माह में विधानसभा के चुनाव संपन्न होने वाले हैं, इस चुनाव में भी भाजपा और कांग्रेस को छोड़ अन्य विपक्षी दलों का लक्ष्य पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तरह होता लग रहा है ?
उत्तर प्रदेश और गोवा में तृणमूल कांग्रेस चुनावी मैदान मैं उतरने के लिए तैयार है ! समझा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में तृणमूल कांग्रेस समाजवादी पार्टी से समझौता कर चुनाव लड़ सकती है वही गोवा में तृणमूल कांग्रेस कांग्रेस के नेताओं को तोड़कर अपनी जमीन तलाश रही है, इससे लगता है कि विपक्ष का राजनीतिक उद्देश्य भाजपा को हराना और कांग्रेस को कमजोर करने का है ?
क्या विपक्षी दल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को कमजोर कर 2024 में एक नया गठबंधन बनाने की तलाश कर रहा है, जिसमें कांग्रेस शामिल नहीं होगी ? और क्या नया गठबंधन कांग्रेस के बगैर बनना संभव नहीं है, इसलिए क्योंकि कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है और कांग्रेस राजनीतिक अस्तित्व और केडर सारे देश में मौजूद है वही केइ राज्यों में कांग्रेस की सरकार भी है, और लोकसभा में भी कांग्रेस के पास अन्य विपक्षी दलों से ज्यादा सीटें हैं ! क्या जो नेता 2024 में अपने आप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकल्प बनने का इरादा रखते हैं उनका इरादा गांधी परिवार के रहते सफल नहीं हो पा रहा है क्या ? क्या इसीलिए विपक्ष के वह नेता पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में अपने लिए कांग्रेस को कमजोर कर राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं ?
एक समय, नरेंद्र मोदी के विकल्प के रूप में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी सब्जबाग दिखाए गए थे, लेकिन आज नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बगैर अधूरे से नजर आ रहे हैं क्योंकि बिहार में नीतीश कुमार भाजपा के सहारे मुख्यमंत्री हैं ! क्या नीतीश कुमार की तरह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी को भी नरेंद्र मोदी का विकल्प बनने का सब्जबाग दिखाया जा रहा है ? क्या ममता बनर्जी मुगालते में आकर भाजपा के खिलाफ बनने वाली विपक्षी एकता पर प्रश्नचिन्ह लगा रही है ?
और क्या कांग्रेस के बगैर, अन्य विपक्षी दल भाजपा के खिलाफ मजबूत गठबंधन बना लेंगे और गांधी परिवार के बगैर कोई अन्य नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकल्प बन जाएगा यह भी एक सवाल है जो पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव पर टिका हुआ है उत्तर का इंतजार कीजिए ?
Devendra Yadav Sr. Journalist |
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