कॉंग्रेस को अचानक क्यों उ.प्र में मिलने लगी मीडिया ओवर रेटिंग
●●Anirudh kumar●●
उत्तर प्रदेश में कॉंग्रेस को अचानक गोदी मीडिया में ओवर रेटिंग कवरेज मिलना कोई इत्तेफाक नही है बल्कि ये कॉंग्रेस (प्रियंका) और भाजपा (शाह) के मध्य अंदरूनी आपसी सहमति का नतीजा है... भाजपा के खुद के जमीनी सर्वे और सरकारी गोपनीय सर्वे में उसकी खुद की स्तिथि बहुत अच्छी नही है बल्कि दिन प्रतिदिन नऐ नऐ हथकंडों के बावजूद ग्राफ ऊपर जाने के बजाय कम ही होता जा रहा है... दिल्ली दरबार भी अड़ियल योगी को हजम नही कर पा रहा लेकिन मजबूरी ये है कि उन्हे हटा पाना भी दिल्ली दरबार के लिऐ सांप-छछूंदर की स्तिथि में पहुंच चुका है... बाबा जी को दिल्ली दरबार न निगल पा रहा है और न उगल पा रहा है... ओवैसी का कार्ड भी बुरी तरह पिट चुका है क्योंकि मुस्लिम समुदाय बिहार और बंगाल चुनाव से समझदार हो गया और उत्तर प्रदेश में मस्जिदें, मदरसे एवं वुद्धिजीवी नागरिक खुद आगे आकर कमान संभाल चुके हैं... पिछड़ा वर्ग एवं दलित समाज जो पिछली बार विधानसभा चुनाव में बहकावे और नकली सब्जबाग में भाजपा की तरफ चला गया था बो भी खुद को ठगा महसूस कर रहा है... युवा वर्ग और आम किसान सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं बुंदेलखंड के बड़े और मजबूत तबके जो पिछली बार भाजपा का समर्थन कर रहे थे बो भी अब बगावत के स्वर में लामबंद हो गऐ... ऐसी स्तिथि में भाजपा को कुछ नही सूझ रहा क्योंकि ईवीएम मईया भी खुल कर साथ देने की स्तिथि में नही हैं... कुछ साथ तो मिल सकता है लेकिन अंतराष्ट्रीय स्तर पर बदलती स्तिथि में अब भाजपा को उससे ज्यादा अपेक्षा नही है... तो फिर भाजपा को एक यही रास्ता दिखा जिससे उत्तर प्रदेश में मृत्यु शय्या पर पड़ी कॉंग्रेस को कुछ सांसे भी मिल जाऐं और भाजपा के भी दो लक्ष्य एक बाण से सध जाऐं... असल में दिल्ली बिहार, बंगाल के चुनाव के बाद एवं ताजा उपचुनाव परिणाम के बाद भाजपा के तथाकथित चाणक्य समझ चुके हैं कि जिस झूंठी जमीन को उन्होने गोदी मीडिया, आई.टी सेल, सोशल मीडिया, विशाल प्रचारतंत्र एवं चुनिंदा धनकुबेरों के धनबल सहित सरकारी तंत्र के दुरपयोग से तैयार किया था उसकी पर्तें उखड़ कर हवा में तैरने लगी हैं... इसलिये स्वघोषित चाणक्य को मजबूरन संघ की जननी, कॉंग्रेस की शरण में जाना ज्यादा बेहतर विकल्प लगा जिसमें दोनों का हित छुपा है... कॉंग्रेस के पास उत्तर प्रदेश में कुछ खोने को है नही और भाजपा को हिमांचल, पंजाब, उत्तराखण्ड, छत्तीसगण में कुछ मिलना नही... कॉंग्रेस जानती है कि यदि उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार बनी तो फिर उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल की तीन बड़ी राजनैतिक शक्तियां मिलकर एक नया गठजोड़ बनायेँगी... जिसमे महाराष्ट्र एवं कुछ अन्य राज्यों के मजबूत राजनैतिक धड़े सैद्धांतिक रूप से साथ होंगे और सामूहिक रूप से अपनी स्वतंत्र दावेदारी प्रस्तुत करेंगे क्योंकि इन राज्यों की प्रमुख राजनैतिक शक्तियों का अपने अपने राज्यों में सत्तारूढ़ होकर एक साथ मिलना, आधे से ज्यादा हिंदुस्तान को प्रभावित करेगा तो बचे हुऐ आधे से भी कम हिंदुस्तान में रह गऐ भाजपा और कॉंग्रेस जो आपस में लड़ेंगे, फिर बो क्या पायेंगे और और खोयेँगे इससे किसी को भी कोई खास फर्क नही पड़ने वाला...
इसलिये भाजपा और कॉंग्रेस दोनों के लिऐ सबसे अहम है कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश को कैसे रोका जाऐ.
ये समस्या जितनी भाजपा को परेशान कर रही है उससे ज्यादा कॉंग्रेस को इसलिये दोनों का गुप्त रूप से एक साथ आना स्वाभाविक भी था और आसान भी... कॉंग्रेस जानती है कि उत्तर प्रदेश मे मृत पड़ी कॉंग्रेस पार्टी को ऑक्सिजन की जरूरत है और वैसे भी उसे कुछ हासिल होने वाला नही और भाजपा चाहती है कि उत्तर प्रदेश मे कॉंग्रेस का कुछ ग्राफ ऊपर बढ़ जाऐ जिससे उसे अधिक से अधिक सीट प्राप्त हो सकें, इसलिये भाजपा के इशारे पर गोदी मीडिया सहित अन्य संसाधनों के माध्यम से कॉंग्रेस के पक्ष मे योजनाबद्ध रूप से एक फर्जी हवा बनाई जा रही है ताकि कॉंग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश मे 30 से 45 सीट तक जीत जाऐ जिसका श्रेय प्रियंका को मिले और बो स्थापित नेता बन जाऐं... चुनाव बाद योगी के चेहरे पर पूर्ण बहुमत ना मिल पाने की स्तिथि मे भाजपा योगी को हटाकर, कॉंग्रेस पार्टी के विधायक तोड़कर एवं इधर उधर से खरीदफरोक्त कर अरविंद शर्मा जैसे किसी चाटुकार को मुख्यमंत्री बना दे...मतलब सांप भी मर जाऐ और लाठी भी ना टूटे... कहा य़े जाऐगा कि प्रियंका की मेहनत से कॉंग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन किया लेकिन भाजपा ने धनबल का प्रयोग कर तोड़फोड़ कर उसके विधायक खरीद लिऐ इससे कॉंग्रेस की भी जयजय और भाजपा की भी जय जय... भाजपा सोचती है कि इस तरह उसकी सरकार भी बन जायेगी और योगी का भी खेल खत्म हो जाऐगा... कॉंग्रेस सोचती है कि उसका क्या, उसके पास तो वैसे ही कुछ नही था उत्तर प्रदेश में, कम से प्रियंका गांधी नेता तो स्थापित हुई और पंजाब, हिमांचल और छत्तीसगढ़ मे तो सरकार बन ही जायेगी... इसलिये गुप्त समझौते के तहत भाजपा खुद कॉंग्रेस का हवाई माहौल तैयार करने पर जी-तोड़ मेहनत कर रही है कि किसी तरह कॉंग्रेस तीस का आंकड़ा पार कर जाऐ... पर उत्तर प्रदेश का मिजाज इस बार पिछली बार की तुलना मे कुछ ज्यादा ही बदला हुआ है और सीधी टक्कर भाजपा और सपा मे होना तय है जिसमे जमीनी स्तर पर भाजपा के सारे हथकंडे पानी मांग रहे हैं... अब परिणाम सिर्फ और सिर्फ अखिलेश के ऊपर निर्भय करेगा कि बो अपनी रणनीति का कितना बेहतर क्रियान्वन जमीन पर कर सकते हैं... टिकट बंटवारा किस तरह करते हैं और निष्पक्ष चुनाव हेतु चुनाव आयोग पर कितना दबाव तैयार कर सकते हैं और सबसे अहम ईवीएम की कितनी रखवाली कर सकते हैं... अगर चुनाव बाद चुनाव मे प्रयुक्त मशीनों को स्ट्रॉंग रूम मे जमा होने के बाद रिजर्व की मशीने स्ट्रॉंग रूम खोलकर रखने का चुनाव आयोग का नाटक ना रुका तो फिर भाजपा अपना काम कर ले जायेगी तो निश्चित तौर पर कॉंग्रेस का आंकड़ा भी तीस पार होगा और भाजपा की एक तीर से दो निशाने की योजना भी सार्थक होगी लेकिन अगर सपा इन मामलों पर चौकस रही और अखिलेश अपनी रणनीति को जमीन तक ले जा पाऐ तो आने वाले समय मे निश्चित रूप से केंद्र की राजनीति मे कॉंग्रेस के मुड़े और झुके हुऐ हाथ मे भाजपा का मुरझाया हुआ कमल दिखाई देगा....
अनुरूद्ध कुमार (मुख्य संपादक) "क्रांतिन्यूज.कॉम"
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