भाजपा : मार्गदर्शक मंडल की चिंता क्यों होने लगी ?
●●Devendra Yadav●●
भाजपा लगातार दूसरी बार केंद्र की सत्ता पर काबिज होने के 8 साल बाद अचानक से अपने वरिष्ठ तम नेताओं की तरफ आकर्षित क्यों होने लगी है?
2014 में पहली बार देश में पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा ने अपनी सरकार बनाई, और 2019 में प्रचंड बहुमत के साथ लगातार भाजपा दूसरी बार केंद्र की सत्ता पर काबिज हुई ! लेकिन इस बीच भाजपा को इस मुकाम तक पहुंचाने वाले नेता सत्ता के गलियारों से नदारद पाए गए, राजनीतिक गलियारों में नदारद नेताओं को मार्गदर्शक मंडल का नाम मिला ! मार्गदर्शक मंडल के 2 सदस्य जसवंत सिंह इस बीच दुनिया छोड़कर चले गए और यशवंत सिन्हा भाजपा को छोड़कर चले गए, लेकिन लालकृष्ण आडवाणी और डॉ मुरली मनोहर जोशी मौजूद, लेकिन सत्ता और संगठन दोनों से दोनों नेता नदारद हैं !
केंद्र में भाजपा की सरकार अपने 8 साल पूरे करने जा रही है, और 8 साल में लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी दोनों को भा जा पा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में स्थान मिला !
और इसी महीने नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का 84 वा जन्मदिन उनके घर पर जाकर मनाया ! सवाल उठता है कि क्या भाजपा को अब अपने वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन की जरूरत आन पड़ी है ? भाजपा की सत्ता में बैठे कुछ वरिष्ठ नेता इन दिनों अपनी ही सरकार की नीतियों को लेकर आक्रामक दिखाई दे रहे हैं, भाजपा के लोकसभा सांसद वरुण गांधी राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी और राज्यपाल सतपाल मलिक जैसे नेता भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करते दिखाई दे रहे हैं ? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 8 साल में यह पहला अवसर है जब उनकी नीतियों के खिलाफ भा जा पा के अंदर से आवाज उड़ती हुई सुनाई दे रही है ! क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसको लेकर चिंतित हैं क्योंकि जो आवाज विपक्ष उठा रहा है ठीक वैसे ही स्वर भाजपा के नेता सतपाल मलिक वरुण गांधी और सुब्रमण्यम स्वामी के श्री मुख से भी सुनाई दे रहे हैं ! क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आशंका है कि कांग्रेस की तरह जी-23 जैसा गठजोड़ भाजपा के अंदर तो नहीं बन जाएगा, क्योंकि यदि राज्यों की बात करें तो राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे भी नाराज दिखाई दे रही है, वसुंधरा राजे चाहती हैं कि भा ज पा 2023 का विधानसभा चुनाव राजस्थान में उनके नेतृत्व में लड़े ! राजस्थान ही नहीं बल्कि कई राज्यों में भाजपा के वे नेता जो अपने राज्यों के मुख्यमंत्री रहे हैं वह भी चाहते हैं कि अपने राज्यों में उनका नेतृत्व कायम रहे ? जबकि उन राज्यों में लंबे समय से नेता अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं और उनका इंतजार ही विवाद का कारण बना हुआ है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड और गुजरात में नए चेहरों को मुख्यमंत्री बना कर अपना मंसूबा बता दिया है कि नए लोगों को अवसर मिलना चाहिए !
कांग्रेस को विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा करने का भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते हुए दिखाई देते हैं ! क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस और विपक्ष के नेताओं का मुंह बंद करना चाहते हैं, अपने वरिष्ठ नेताओं को सम्मान देकर !
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