राजस्थान भाजपा में संकट,
वसु मैडम की जगह कौन होगा ?
Devendra Yadav
राजस्थान में भाजपा को सत्ता से बाहर हुए 3 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं, भाजपा प्रदेश में मुख्य और ताकतवर विपक्ष के रूप में होने के बाद भी 3 सालों में सत्ताधारी कांग्रेस को किसी भी मुद्दे पर मजबूती के साथ घेरती हुई नहीं नजर आई ! विधानसभा के भीतर 87 सीटों के साथ भा जा पा मजबूत विपक्ष की भूमिका में है लेकिन भा जा पा विधानसभा के भीतर भी सत्ता पक्ष कांग्रेस के खिलाफ मजबूत आवाज नहीं उठा पाई ! भाजपा विपक्ष में रहते हुए, सत्ता पक्ष के खिलाफ दमदार प्रदर्शन और आंदोलन करने के रूप में जानी जाती है मगर राजस्थान में 3 साल के अंदर भाजपा ऐसा कुछ भी नहीं कर पाई, इसकी झलक हाल के दिनों में संपन्न हुए 2 विधानसभा के उपचुनाव परिणाम देखने को मिली, इन दो उपचुनाव में भाजपा हारी ही नहीं बल्कि जमानत भी नहीं बचा पाई !
राजस्थान भाजपा के भीतर कांग्रेस से अधिक मजबूत जमीनी नेता मौजूद हैं, और उनकी मौजूदगी में भा जा पा दोनों उपचुनाव बुरी तरह से हारी !
राजस्थान में भाजपा के पास मजबूत कैडर मौजूद है, प्रदेश में आर एस एस का भी अपना मजबूत केडर है !
क्या भाजपा के भीतर मजबूत कैडर और मजबूत जन नेताओं की भरमार ही भाजपा का सबसे बड़ा संकट है ? और भाजपा के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रहा अंतर कलह मजबूत जनाधार वाले नेताओं की अति महत्वाकांक्षा है ? सवाल यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे की जगह कौन लेगा ? वसुंधरा की जगह लेने वाले नेताओं की प्रदेश में लंबी फेहरिस्त है ? राजस्थान भाजपा की राजनीति को देखें तो प्रदेश में अभी तक भा जा पा जब जब भी सत्ता में रही है तब तब राज्य का मुख्यमंत्री राजपूत समुदाय से ही बना है, और राजपूत में भी भैरों सिंह शेखावत और उनके बाद श्रीमती वसुंधरा राजे राज्य की मुख्यमंत्री रही हैं, सवाल उठता है कि यदि 2023 के विधानसभा चुनाव में नेतृत्व बदला गया तो क्या फिर से कोई राजपूत ही चेहरा होगा ? यदि राजपूत नेता की बात करें तो भाजपा के भीतर प्रदेश में पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ नरपत सिंह गजेंद्र सिंह शेखावत दीया कुमारी राज्यवर्धन राठौर जैसे नाम मौजूद हैं ! और यदि गैर राजपूत समुदाय के नेताओं की बात करें तो गुलाबचंद कटारिया अशोक परनामी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मदन दिलावर जैसे बहुतेरे नाम मौजूद है जो लंबे समय से अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं, मगर पहले भैरों सिंह शेखावत जी के कारण और बाद में श्रीमती वसुंधरा राज्य के कारण उन नेताओं का नंबर नहीं आया ! क्या राजस्थान में पार्टी हाईकमान गुजरात और उत्तराखंड त्रिपुरा की तरह वक्त आने पर नया चेहरा मैदान में उतारेगी, राष्ट्रीय नेतृत्व की राजस्थान के संकट को लेकर जो खामोशी नजर आ रही है उससे तो ऐसा ही लगता है की राष्ट्रीय नेतृत्व राजस्थान में चौका देने वाला नेतृत्व मैदान में उतारे गा ! क्या वह नेतृत्व बनिया समुदाय से होगा ? शायद पांच राज्यों के चुनाव होने के बाद तक इसका इंतजार करना होगा ?
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