तीन कृषि बिल होंगे रद्द, किसकी जीत और किसकी हार ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर को गुरु नानक जयंती और श्रीमती इंदिरा गांधी की जयंती के दिन तीन कृषि बिलों को निरस्त करने की घोषणा की है !
1 साल से पहले संसद में पास हुए कृषि बिलो के खिलाफ देश के किसान 1 साल से आंदोलित थे और दिल्ली के बॉर्डर पर धरना देकर बैठे हुए थे, और तीनों कृषि बिलों को निरस्त करने की सरकार से मांग कर रहे थे ! प्रकाश पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंदोलनकारी किसानों की मांग को मध्य नजर रखते हुए तीनों कृषि बिलों को निरस्त करने की घोषणा की, घोषणा देश को चौका देने वाली थी, क्योंकि किसी को भी अंदाजा नहीं था की प्रधानमंत्री ऐसे अचानक आकर कृषि बिलों को रद्द करने की घोषणा कर देंगे ! लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की और घोषणा के साथ ही इस मुद्दे पर राजनीति होते हुए दिखाई देने लगी ! चर्चा होने लगी की तीन कृषि बिलों को रद्द करने की घोषणा से किसे फायदा होगा और किसे नुकसान होगा !
विपक्ष इस घोषणा को पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देख रहा है खासकर उत्तर प्रदेश और पंजाब विधानसभा चुनाव से जोड़कर देख रहा हैं और आरोप लगा रहा हैं की भाजपा सरकार ने अपनी हार को देखते हुए तीन कृषि बिलों को रद्द करने की घोषणा की है ! राजनीतिक विश्लेषक भी इस घोषणा के बाद अलग-अलग तरह से विश्लेषण करते हुए दिखाई दिए ! क्या कृषि कानून की वापसी की घोषणा पांच राज्यों के चुनाव को मध्य नजर रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है? भा जा पा किसान आंदोलन के कारण चुनाव में होने वाले नुकसान से डर गई है ? या किसान आंदोलन और भाजपा सरकार की नीतियों को लेकर भाजपा के अंदर से ही नेताओं की आवाज उठने लगी है ? क्या भाजपा नेताओं की आवाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और उनकी आवाज पर भारी पड़ती हुई दिखाई दे रही हैं ? क्योंकि 7 साल में भाजपा के नेता इससे पहले कभी भी प्रधानमंत्री की नीतियों और आवाज को काटते हुए नजर नहीं आए मगर हाल के दिनों में सतपाल मलिक वरुण गांधी सुब्रमण्यम स्वामी जैसे वरिष्ठ नेता केंद्र सरकार की नीतियों पर सवालिया निशान उठाते हुए नजर आए खासकर किसान आंदोलन के समर्थन में, यह आवाज और अधिक बड़ी ना हो क्या इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि बिलों को निरस्त करने की घोषणा की है ? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घटना के बाद मोदी तो चर्चा में रहे हैं साथ में विपक्ष के नेता कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी अधिक चर्चा में रहे क्योंकि राहुल गांधी पहले दिन से ही यह कहते हुए दिखाई दे रहे थे की सरकार को तीनों बिल वापस लेने पड़ेंगे 19 नवंबर को राहुल गांधी की बात सत्य हुई ! राहुल गांधी ने भूमि अधिग्रहण बिल को भी रद्द करवाया था जिसका उल्लेख राहुल गांधी बार-बार करते थे और हवाला देते थे कि जिस प्रकार से भूमि अधिग्रहण बिल रद्द हुआ था वैसे ही तीनों कृषि दिल भी 1 दिन रद्द होंगे !
अब सवाल उठता है कि तीनों कृषि बिल रद्द होने के बाद पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भा जा पा को फायदा होगा या नहीं इसका मार्च 2022 तक इंतजार करना होगा इंतजार इस बात का भी है कि संसद के शीतकालीन सत्र में तीनों कृषि बिल किस तारीख को संवैधानिक तरीके से निरस्त होंगे ?
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