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Sunday, November 21, 2021

11/21/2021 11:20:00 AM

राजस्थान मंत्रिमंडल का पुनर्गठन,गहलोत और पायलट की जीत ! क्या सत्ता दिलाने वाले कार्यकर्ता की होगी हार ?



Devendra Yadav

राजस्थान में बहु प्रतिक्षित मंत्रिमंडल का आखिर पुनर्गठन होने जा रहा है ! मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक विवाद को खत्म करने की कड़ी मैं यह एक हाईकमान का प्रारंभिक प्रयास है इस प्रयास में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट दोनों की जीत तो हो गई है, मगर इस जीत की माला से निकले फूल बता रहे हैं कि जिन कार्यकर्ताओं ने 5 साल तक भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए मेहनत की थी उन कार्यकर्ताओं की हार होती हुई दिखाई दे रही है क्योंकि खबर यह निकलकर आ रही है कि जिन विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है उन विधायकों को निगम बोर्ड और आयोगों मैं शामिल किया जाएगा और कुछ विधायकों को यूआईटी का चेयरमैन भी बनाया जाएगा ?

जबकि पूर्व में इन पदों पर उन कार्यकर्ताओं को अवसर दिया जाता रहा है जो कार्यकर्ता मेहनत कर कांग्रेस को सत्ता में पहुंचाते हैं ! मैंने पूर्व में लिखा था कि गहलोत के लिए पुनर्गठन करना इतना आसान नहीं है, जिसकी बानगी हो रहे पुनर्गठन में स्पष्ट दिखाई दे रही है, गहलोत ने अपने पूर्व के सहयोगी मंत्रियों को मंत्री पद से नहीं हटाया है बल्कि केइ मंत्रियों को पदोन्नति दी है उन्हें राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री बनाया है ! गहलोत ने विधायकों को अपना सलाहकार नियुक्त भी किया है, शायद यह पहला अवसर है जब किसी मुख्यमंत्री ने विधायकों को बड़ी संख्या में अपना सलाहकार नियुक्त किया है! क्योंकि नियम के अनुसार जरूरत से ज्यादा विधायकों को मंत्री और संसदीय सचिव नहीं बनाया जा सकता है इसलिए गहलोत ने कुछ विधायकों को अपना सलाहकार नियुक्त किया है और कुछ को निगम बोर्ड आयोग और यूआईटी में नियुक्ति देने की तैयारी चल रही है !

अब सवाल उठता है कि यदि निगम बोर्ड आयोग और यूआईटी में भी विधायकों की तैनाती कर दी जाएगी तो फिर आम कार्यकर्ताओं के लिए सरकार में शामिल होने के लिए क्या बचेगा जो मैंने पूर्व में लिखा था की आम कार्यकर्ताओं के हिस्से में केवल लॉलीपॉप आएगी यानी आम कार्यकर्ता केवल मेंबर बनेंगे ?

मंत्रिमंडल पुनर्गठन के बाद हाईकमान का विवाद को निपटाने का दूसरा फार्मूला प्रदेश कांग्रेस कमेटी का पुनर्गठन होना होगा, क्या इसमें भी आम कार्यकर्ता की हार होगी क्योंकि प्रदेश कार्यकारिणी और जिला अध्यक्षों की सूची में ज्यादातर वह नेता शामिल होते हैं जो या तो विधायक हैं या फिर चुनाव हार कर बैठे हुए हैं, क्या संगठन के पुनर्गठन में भी ऐसी ही झलक दिखाई देगी, क्या वहां भी आम कार्यकर्ताओं के हाथ में लॉलीपॉप थमा दी जाएगी ? राजस्थान कांग्रेस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच राजनीतिक विवाद आम कार्यकर्ताओं के सम्मान को लेकर हुआ था, सचिन पायलट बार-बार आम कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिल रहा है इसका जिक्र करते हुए दिखाएं देते थे और कहा करते थे कि जिन कार्यकर्ताओं ने प्रदेश में भाजपा की सरकार को उखाड़ पर फेंका उन कार्यकर्ताओं को सरकार में भागीदारी मिले !

लेकिन सम्मान अभी भी उन नेताओं को मिलता हुआ दिखाई दे रहा है जो नेता विधायक के रुप में सत्ता में मौजूद हैं ! क्या गहलोत और पायलट के बीच राजनीतिक विवाद इतना भर था की उनके विधायकों को सत्ता में जगह नहीं मिल रही है ? क्या अब दोनों नेता संतुष्ट हैं मगर दोनों नेता अपने अपने कार्यकर्ताओं को कैसे संतुष्ट करेंगे यह सबसे बड़ा सवाल है और इसके उत्तर का अभी इंतजार करना होगा ?


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