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Thursday, November 25, 2021

11/25/2021 09:21:00 AM

कांग्रेस: गहलोत और पायलट की हूंकार, 

भाजपा: वसुंधरा राजे का पलटवार !


●Devendra Yadav●

राजस्थान में मंत्रिमंडल पुनर्गठन के बाद, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चला आ रहा राजनीतिक विवाद, दोनों नेताओं के द्वारा दिए जा रहे सकारात्मक बयानों के बाद लगता है अब समाप्त हो गया है !


दोनों ही नेता एकता का परिचय देते हुए, सन 2023 मैं राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार कांग्रेस को सत्ता में लाने की बातें करने लगे हैं! मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट, कांग्रेस को लगातार दूसरी बार सत्ता में लाने की हुंकार तो भर रहे हैं, मगर सवाल अब भी जस का तस बना हुआ है कि, 2023 का विधानसभा चुनाव किस नेता के नेतृत्व में लड़ा जाएगा ? मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में लड़ा जाएगा या फिर और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के नेतृत्व में लड़ा जाएगा ? हालांकि दोनों नेताओं की तरफ से अभी तक एक ही बयान आता हुआ सुनाई दे रहा है कि कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ती है ! लेकिन गहलोत और पायलट खेमों में बटी कांग्रेस के नेताओं के बयान अभी भी भ्रमित कर रहे हैं और राजनीतिक गलियारों में राजनीतिक सुर्खियां बना रहे हैं ! दोनों ही नेताओं के खेमे के नेता अपने अपने नेता के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बातें करते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि स्वयं अशोक गहलोत और सचिन पायलट एकजुटता का परिचय देते हुए बता रहे हैं कि कॉन्ग्रेस एकजुट है और एकजुट होकर 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ेगी और लगातार दूसरी बार प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाएगी ! खैर यह तो हुई कांग्रेस की बात अब भाजपा की बात करें तो, पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे न प्रदेश में धार्मिक यात्राओं के माध्यम से 2023 में भाजपा की वापसी कराने के संकेत दे दिए हैं, वसु मैडम की इस यात्रा को गहलोत और पायलट की हुकार पर पलटवार के रूप में देखें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं है !


वैसे तो, श्रीमती वसुंधरा के लिए चुनाव से पूर्व प्रदेश में धार्मिक यात्राएं करना कोई नई बात नहीं है, इस यात्रा से पहले भी चुनाव से पूर्व वसु मैडम धार्मिक यात्राएं करती रही हैं, बल्कि यह कहे कि वसु मैडम चुनाव का आगाज धार्मिक यात्राओं से ही शुरू करती हैं ! सवाल यह है कि कांग्रेस के अंदर का राजनीतिक विवाद तो थम सा गया है और कांग्रेस के नेता एकजुटता का परिचय देते हुए 2023 मैं कांग्रेस को लगातार दूसरी बार सत्ता में लाने के लिए हु कार भी भर रहे हैं लेकिन क्या भा जा पा में चल रहा विवाद भी खत्म हो गया है ? वसुंधरा राजे की धार्मिक यात्राओं मैं उनके स्वागत में उमड़ रहे जन सैलाब को देखने पर लगता है कि आने वाले दिनों में भाजपा भी एकजुटता का परिचय देते हुए भा जा पा को प्रदेश की सत्ता में वापसी की बातें करते हुए सुनाई दे ! प्रदेश में अभी भी भाजपा के भीतर वसुंधरा राजे से बड़ा कद्दावर नेता दिखाई नहीं दे रहा है जो भाजपा को अपने दम पर सत्ता में वापसी करा सके !

बड़ी बात तो यह है कि प्रदेश में कद्दावर नेता और कद्दावर कार्यकर्ता आज भी वसुंधरा के साथ खड़े हुए हैं, शायद इसलिए क्योंकि उनका राजनीतिक भविष्य वसुंधरा के बगैर अधूरा है! श्रीमती वसुंधरा की प्रदेश में धार्मिक यात्राएं अभी तो राजनीतिक संदेश देने के लिए प्रारंभ है, आगे वसुंधरा और कौन सी यात्रा करेंगी इसका अभी इंतजार करना होगा !

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