सांप ओर नेवले की दोस्ती असम्भव है।
Badal Singh Bauddh
खुद का वजूद खो चुकी बहन जी को कभी स्वयं की गलतियों पर भी मंथन करना चाहिए। अब भी बहनजी ब्रहामण सम्मेलन कर उसमे अपना भविष्य तलाश रही है। उससे ज्यादा फोकस अगर एस.सी./एस.टी. ओ.बी.सी. व अल्पसंख्यको को एकजूट करने पर करती सायद ज्यादा लाभकारी होता। सांप ओर नेवले की दोस्ती असम्भव है। समाज के लोगो से अगर सीधा संवाद किया होता तो आज सपा खूद बैकफुट पर होती। सतीश चंद्र ब्राह्मण को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया होता तो आज संगठन कमजोर न हुआ होता । पार्टी के मैन वोट बैंक की कद्र की होती तो आज बिखराव न हुआ होता आदि।
भाजपा व संघ यही चाहता था कि बसपा को कमजोर कर दलित राजनीति को हासिये पर लाया जाऐ। जिससे केंद्र मे मुलनिवासी सत्ता कभी स्थापित न हो पाये। ओर वे अपने मकसद मे कामयाब भी हुऐ। बहनजी की गलती की सजा आज पूरे समाज को भुगतनी पड रही है क्योंकि अब भविष्य मे भी ऐसा मजबूत संगठन खडा होने मे सदिया गुजर जाऐगी। हम सैकड़ों वर्ष पिछे जा चुके है। बाबा साहेब ओर कांसीराम साहब को कारवां बहुत पीछे हट चुका है। उधर समाज के सक्षम लोग ,नौकरशाह व सफेदपोस अहसो आराम मे लगे है। किसी की जेब से मुवमेंट को देने के लिऐ फूटी कोडी नही निकलती । अपनी वाहवाही के लिऐ भले ही कुछ निकल जाऐ। सब भाषणवाजी व अहसो आराम तक सीमित है। अतः मेरा मिशनरी गरीब साथियों से अपील है वे ही इस पवित्र कांरवा को आगे बढाने हेतू आगे आये। हमारे समाज का अभिजन वर्ग कुछ नही करेगा। आप ही इस भारत के भाग्य विधाता है।
नमो बुध्दाय
जय भीम
जय मुलनिवासी
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
0 Comments:
Post a Comment
THANKS FOR COMMENTS