देश के 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन में शहीद हुए वीर मनीराम अहिरवार जी को सम्मान दिलाने पुत्रवधु की सरकार से मांग
"अमर शहीद वीर मनीराम जी को सम्मान दिलाने पुत्रवधु गौराबाई अहिरवार ने की आन्दोलन की घोषणा।"
●● Mool Chand Madhoniya●●
भोपाल । मध्यप्रदेश के एकमात्र अनुसूचित जाति के वीर शहीद मनीराम अहिरवार जी की पुत्रवधु गौराबाई अहिरवार ने केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार से मांग की है कि नरसिंहपुर तहसील गाडरवारा के नगर चीचली के मूल निवासी गौड़वाना राजमहल की सुरक्षा में तैनात वीर मनीराम जी अपने पिता और परिवार सहित सेवादार के रूप में रहे है। मेरे परिवार में मेरे ससुर तीन भाई थे, छोटेलाल अहिरवार, मनीराम अहिरवार, भगवत सिंह अहिरवार (गुनऊ फौजी) बड़े भाई पूर्व में चीचली राजमहल में सेवा करते हुए, निधन हो चुका था। छोटे ससुर भारतीय सेना में शामिल होकर आजादी के आन्दोलन में शहीद हुए। वह कभी वापिस गांव नहीं आये। मेरे पति दो भाई और तीन बहिनों की जबावदारी और शादी करने की जिम्मेदारी वीर मनीराम जी के कंधों पर थी। उन्हें चीचली गौड़वाना राजा से मिलने वाले वेतन में सभी को पाल कर विवाह आदि किया।
उस समय स्वतंत्रता संग्राम का देश भर में आन्दोलन चल रहा था। चीचली गोंड बूढे राजा भी निर्वाण प्राप्त कर चुके थे। जिनके पुत्र शंकर प्रसाद जी थे। जो बाहर पढ़ाई करने चले गए। महल सूना था, सुरक्षा की जिम्मेदारी वीर मनीराम अहिरवार जी करते आ रहे थे। मेरे पूर्वजों को चीचली बूढ़े राजा साहब जी ही साथ लाये थे, जो कि मेधोनिया परिवार के नाम से चीचली की पवित्र "सीता रेवा" नदी के किनारे बसाये गयें थे। जो कि आज भी नदी के दोनों तटों के किनारों पर बसे हुए हैं।तथा अपना जीवन यापन कर रहे हैं। चीचली गोंड राजा का चालीस गांवों में साम्राज्य था। आज भी उनकी भूमि और संपत्ति हर जगह मौजूद है।
महात्मा गांधी के आह्वान पर जब अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन का और सविनय अविज्ञा आन्दोलन चल रहा था। इसी समय 23 अगस्त 19 42 को अंग्रेजी सेना ने चीचली महल पर कब्जा करने के उद्देश्य से हमला कर दिया। सूने महल में सुरक्षा के लिए वीर मनीराम जी तैनात थे। जिन्होंने अंग्रेजी सेना से सामना कर युद्ध लडा और उन्हें परास्त कर गांव से खदेड़ दिया ।इस युद्ध में वीर मनीराम पर चली गोलीओं में जो घटना पर शहीद हुए वे थे। वीर मंशाराम जसाटी जी वीरांगना गौरादेवी कतिया । मेरे क्रांतिकारी वीर ससुर श्री मनीराम ने सीना तान कर युद्ध किया और सभी सैनिकों को घायल कर गांव से भगाकर विजय प्राप्त की। राजमहल पर देश का राष्ट्रीय तिरंगा झंडा फहराया।
अंग्रेजी अफसरों ने कुछ दिनों बाद मेरे ससुर को धोखा एवं छल से उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उनसे प्राणों के बदले अनुसूचित जाति के लोगों को गुलामी और बेगारी कराने के लिए लाने के लिए लगातार बोला गया लेकिन उन्होंने साफ कहा कि न मैं तुम्हारी गुलामी करुंगा और न ही समाज के युवाओं को गुलाम बनने दूंगा। परिणामस्वरूप उन्हें तरह तरह की यातनाएं देकर उनकी गुप्त बंदीगाह में बली दे दी गई।
देश के प्रति मेरे ससुर वीर मनीराम और भगवत सिंह जैसे महान क्रांतिकारी युद्धाओं ने शहादत दी है। लेकिन ऐसे शूरवीरों का किसी भी सरकारों ने उन्हें राष्ट्रीय शहीद होने का दर्जा नहीं दिया है। आखिर क्यों नहीं क्या अछूत समाज के होने के कारण वंचित किया है। उनके साथ में रहे लोगों को शहीद और मेरे ससुर ने युद्ध लडा फिर उनके साथ अन्याय क्यों? क्या दलित महापुरुषों को ऐसे ही अपमान किया जायेगा। देश में अनेक बुध्दिजीवी है, बड़े से बड़े विद्वान है, कोई हजारों वर्ष पुरानी कहानी नहीं है वीर मनीराम जी अहिरवार की बहू और उनके पौता मूलचन्द मेधोनिया ने मांग की है कि जिला के इतिहास की जांच-पड़ताल कराई जाये। जब सबरणों का योगदान स्वतंत्रता आंदोलन का देखकर उन्हें सम्मान तो वीर मनीराम जी अहिरवार को क्यों नहीं। 23 अगस्त को वर्षों से मेरे ससुर जी की वीरता का गुणगान "शहीदों को श्रद्धांजलि कार्यक्रम" में होता है। जिला और प्रदेश के स्वतंत्रता आंदोलन की पुस्तकों में नाम आता है। नरसिंहपुर जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और उन दिनों के लेखकों, पत्रकार इत्यादियों ने वीर मनीराम अहिरवार जी का विवरण प्रकाशित किया है। जो कि वीर मनीराम जी की पुत्रवधु गौराबाई अहिरवार और सुपौत्र मूलचन्द मेधोनिया के पास है।
देश की अब तक की कांग्रेस सरकार ने उन्हें सम्मान न दिये जाने की महान भूल की है। सरकार किसी भी की हो शीघ्र वीर मनीराम जी अहिरवार को राष्ट्रीय शहीद का दर्जा प्रदान कर परिवार की सहायता की जाये। यदि सरकार इन्हें सम्मान से वंचित रखेगी तो उत्तराधिकारी गौराबाई अहिरवार ने घोषणा की है कि मेरे पुत्र के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की अनुसूचित जाति के प्रादेशिक समाज में जाकर हमारे अमर शहीद वीर मनीराम जी की उपेक्षा को लेकर बड़ा आन्दोलन किया जायेगा एवं जनसमुदाय को बताया जायेगा की ऐसी गलतियां इतिहास में जानबूझकर हमारे महापुरुषों को अपमानित करने के उद्देश्य से की गई है। उल्लेखनीय है कि चीचली गौड़वाना राजा शंकर प्रताप सिंह जू देव पढ़ाई कर राजमहल चीचली आकर महल को संरक्षित करने और वफादार शहीद परिवार की गौराबाई अहिरवार को बीस एकड़ जमीन और इनके पुत्रों को शासकीय नौकरी देने की घोषणा की थी। जो चीचली राजा के निधन उपरांत सरकार से अप्राप्त है। घोर उपेक्षा व अन्याय का शिकार दलित शहीद परिवार आज न्याय के लिए भटक रहा है।
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