ग्राम पंचायत शाहाबाद के सरपंच रामनिवास यादव की दबंगई के सामने "प्रशासन गांव के संग" शिविर की कार्यवाही साबित हुई दिखावा ,एसडीएम के आदेश हुए हवा । नहीं हटाया गया अतिक्रमण।
●●Kashmeer Singh●●
अलवर जिले की तिजारा तहसील के गांव शाहाबाद का मामला।
एक और जहां राज्य सरकार विद्यार्थियों के खेलने हेतु मैदान उपलब्ध कराने के हर संभव प्रयास कर रही है। गांव शाहाबाद मैं इसके ठीक विपरीत मामला सामने आया है। शाहबाद के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल परिसर में सरपंच रामनिवास यादव द्वारा अवैध रूप से मालवा पत्थर डालकर जबरन अतिक्रमण किया हुआ है जिससे विद्यार्थियों को खेलने कूदने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अतिक्रमण को हटाने के उद्देश्य से विद्यालय के छात्रों का एक समूह प्रधानाचार्य रामबाबू यादव से मिला और परिसर खाली कराने के लिए निवेदन किया लेकिन प्रधानाचार्य रामबाबू ने छात्रों को यह कहते हुए धमका दिया की " मैंने यदि मैदान खाली करने के लिए कहा तो सरपंच मेरा तबादला कहीं और करा देगा इसलिए मैं कुछ नहीं कर सकता " ।
इस बात से नाराज होकर विद्यालय के छात्रों का समूह ग्राम पंचायत के उपसरपंच विक्रम कुमार से मिला और अतिक्रमण हटाने के लिए निवेदन किया । विक्रम कुमार ने प्रधानाचार्य को दिनांक 19/06/2021 को लिखित में शिकायत पत्र सौंपा और अतिक्रमण हटाने के लिए कहा लेकिन प्रधानाचार्य रामबाबू ने कोई कार्यवाही नहीं की।
दिनांक 24 /11/2021 को शाहाबाद भाईचारा युवा संगठन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार नाहर वाडिया ने एक शिकायत पत्र प्रशासन गांव के संग शिविर में शिविर प्रभारी उपखंड अधिकारी को सौंपा जिसमें उपखंड अधिकारी ने अतिक्रमण हटाने के लिए आदेश दिया लेकिन यह कार्यवाही केवल मात्र एक दिखावा बनकर रह गई और अतिक्रमण आज तक भी नहीं हटाया गया।
उपसरपंच विक्रम कुमार द्वारा एक शिकायत पत्र राष्ट्रीय मानव अधिकार एवं महिला बाल विकास आयोग नई दिल्ली के मुख्य महासचिव डॉ रविंद्र मिश्रा के नाम से प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर महेंद्र सिंह बर्मन को दिया तथा अतिक्रमण हटाने के लिए निवेदन किया।
डॉ महेंद्र सिंह बर्मन द्वारा इस संबंध में मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी श्री हरीश गुप्ता को अवगत कराया गया। हरीश गुप्ता द्वारा मामले की जांच कर मामले को गंभीरता से लेते हुए अतिक्रमण को हटवाने का आश्वासन देते हुए भरोसा दिलाया की अतिक्रमण जल्द से जल्द हटा दिया जाएगा । किंतु यह आश्वासन भी एकमात्र दिखावा बनकर रह गया और अतिक्रमण आज तक नहीं हटाया गया।
अब सवाल यह उठता है कि क्या सरपंच रामनिवास यादव की राजनैतिक पहुंच के आगे उपखंड अधिकारी जैसे प्रशासनिक अधिकारी के आदेश कि कोई मेहत्ता नहीं है या यह आदेश केवल मात्र दिखावे के लिए दिया गया था ?
सरपंच रामनिवास यादव कि इतनी अनियमितताएं सामने आने के बाद भी प्रशासन आंखें बंद किए मौन क्यों बैठा है ?
आखिर क्या कारण है की प्रशासन इतना लाचार है वह मजबूर है ?
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