ग्राम पंचायत शाहाबाद के पटवारी प्रमोद कुमार यादव एवं सरपंच रामनिवास यादव की मिलीभगत का हुआ खुलासा।
जिला कलेक्टर के आदेश पर तहसीलदार तिजारा द्वारका प्रसाद शर्मा टीम सहित पहुंचे जांच करने ,पैमाइश में पाया अंतर।
अलवर के तिजारा तहसील के गांव शाहाबाद का मामला।
Alwar@Kashmeer Singh
ग्राम पंचायत शाहाबाद के सरपंच रामनिवास यादव एवं ग्राम पंचायत पटवारी प्रमोद कुमार यादव की मिलीभगत का एक नया मामला सामने आया है। ग्यासा राम यादव द्वारा निवास स्थान एवं बस्तियों हेतु स्वीकृत भूमि खसरा नंबर 989 में कृषि कार्य करने एवं वहां के निवासियों का नींव भरकर रास्ता अवरुद्ध करने का मामला सामाजिक कार्यकर्ता राम सिंह द्वारा उठाया गया था।
जिसकी शिकायत ग्राम सचिव से लेकर जिला कलेक्टर तक की गई थी लेकिन अतिक्रमण नहीं हटाया गया । दिनांक 10 जनवरी 2022 को तहसीलदार द्वारा अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया गया । जिसके तहत ग्राम पंचायत शाहाबाद के सरपंच रामनिवास यादव एवं ग्राम पंचायत पटवारी प्रमोद कुमार यादव पुलिस प्रशासन सहित अतिक्रमण हटाने पहुंचे थे।
पटवारी प्रमोद कुमार यादव ने ग्यासा राम यादव द्वारा किए गए अतिक्रमण को बचाने के लिए गलत पैमाइश की तथा शिकायत करता राम सिंह के निर्माण कार्य को अवैध बताते हुए जेसीबी से ध्वस्त करते हुए रास्ता निकाला ।जिसमें लगभग 100 साल पुराने पीर बाबा की दीवार को तोड़कर रास्ता बनाया और ग्यासा राम के अतिक्रमण को बचा दिया।
उक्त मामले की शिकायत राम सिंह ने दिनांक 12 जनवरी 2022 को जिला कलेक्टर नन्नू मल पहाड़िया से की जिस के आदेश पर दिनांक 20 जनवरी 2022 को तिजारा तहसील दार द्वारका प्रसाद शर्मा अपनी टीम लेकर पुनः जांच करने पहुंचे और पैमाइश की। पटवारी प्रमोद कुमार यादव द्वारा की गई पैमाइश और तहसीलदार तिजारा द्वारा की गई पैमाइश में अंतर पाया गया । जिससे सरपंच रामनिवास यादव एवं पटवारी प्रमोद कुमार यादव की ग्यासा राम से मिलीभगत का खुलासा हुआ।
तिजारा तहसील दार से वहां के निवासियों ने नींव भरकर अवरुद्ध किए गए रास्ते को खुलवाने एवं अतिक्रमण हटवाने के लिए पुनः निवेदन किया । तहसीलदार ने अतिक्रमण हटवाने में असमर्थता जताई और कहा की" ग्राम पंचायत अतिक्रमण नहीं हटाना चाहती तो मैं क्या कर सकता हूं। मेरा काम केवल की गई पैमाइश की जांच करना है जो मैं कर रहा हूं। यदि आप पैमाइश से संतुष्ट नहीं है तो एक शिकायत पत्र लिखो जिस पर मैं आदेश कर दूंगा कि उक्त पैमाइश को सेटलमेंट टीम द्वारा कराया जाए इससे अधिक मैं कुछ नहीं कर सकता।"
सवाल यह उठता है कि यदि प्रशासनिक अधिकारी पीड़ित को न्याय नहीं दिला सकते तो राज्य सरकार द्वारा इनकी नियुक्ति ही क्यों की जाती है ? जनता द्वारा दिए जा रहे करो से ही इन प्रशासनिक अधिकारियों को वेतन मिलता है जबकि अधिकारी जनप्रतिनिधियों के दबाव में आकर अपनी कर्तव्य परायणता को भूल जाते हैं और अपने कर्तव्य के साथ न्याय नहीं करते।
क्या ग्यासा राम यादव द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने में पूरा प्रशासनिक ढांचा ही असफल हो गया है या यह नीचे से लेकर ऊपर तक एक ही जाति के लोगों की बनी श्रंखला (अतिक्रमण करता ,सरपंच ,पटवारी एवं उपखंड अधिकारी ,विधायक एवं सांसद सभी यादव समाज से हैं) का परिणाम है ?
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