मानव तस्करी व बंधुआ मजदूरी से मुक्ति के बाद मुक्ति प्रमाण पत्र जारी हुआ किंतु पुनर्वास की योजना से कोई राहत नहीं मिलीं और ना ही बकाया वेतन
मध्य प्रदेश के अनेकों सहेरिया आदिवासी परिवार बारां राजस्थान में बंधुआ गिरी के शिकार
*सहेरीया परिवार के बच्चो से जबरन काम लिया जा रहा था*
नेशनल कैंपेन कमिटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ़ बॉन्डेड लेबर ने सहरिया परिवार के बंधुआगिरी का उठाया मामला*
देशभर में मानव तस्करी एवं बंधुआ मजदूरी के खिलाफ संघर्ष कर रहे संगठन नेशनल कैंपेन कमिटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ़ बॉन्डेड लेबर को पता चला की राजस्थान के बारां जिले के अटरू तहसील में महेशपुरा गांव में सहरिया आदिवासी परिवार को मानव तस्करी के जरिए पहुंचाया गया है जहां पर इस सहेरियां परिवार के प्रत्येक सदस्य से बंधुआ मजदूरी करवाई जा रही है।
नेशनल कैंपेन कमिटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ़ बॉन्डेड लेबर के राष्ट्रीय कन्वेनर निर्मल गोराना अग्नि ने बताया की 26 नवंबर 2021 को जिलाधिकारी बारां एवं एसडीएम अटरू को लिखित शिकायत भेज कर सहरिया आदिवासी परिवार को मानव तस्करी एवं बंधुआ मजदूरी के मकड़जाल से मुक्त कराने हेतु पहल की। इस मामले पर प्रकाश डालते हुए निर्मल गोराना अग्नि ने बताया कि करण सहरिया जो कि सोठी तहसील जिला गुना का रहने वाला सहरिया आदिवासी परिवार देश में कोरोना महामारी एवं लोक डाउन के चलते रोजगार न मिलने की वजह से भूखमरी से जूझ रहा था वही अटरू निवासी दिनेश नामक व्यक्ति ने करण सहरिया की मजबूरी का फायदा उठा कर उसको ₹30000 एडवांस राशि के रूप में दिए और उस 30,000 की वसूली के लिए दिनेश ने करण एवं उसकी पत्नी के साथ उसके दो नाबालिग मासूम बच्चों को अटरू तहसील के महेशपुरा गांव में रहने वाले भगवान मीणा के घर बेच दिया और दिनेश नौ दो ग्यारह हो गया।
6 दिसंबर, 2022 को अटरू प्रशासन के साथ सोशियो लीगल इनफॉरमेशन सेंटर के अधिवक्ता आमीन खान, नरेंद्र भदोरिया तथा नेशनल कैंपेन कमिटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ़ बॉन्डड लेबर के राजाराम ने संयुक्त रूप से मिलकर करण के परिवार को मानव तस्करी एवं बंधुआ मजदूरी करवा रहे भगवान मीणा के चंगुल से मुक्त करवाया।
निर्मल गोराना अग्नि ने बताया की अटरू एसडीएमने आज दिनांक 30 जनवरी, 2022 को मुक्त बंधुआ मजदूर परिवार को मुक्ति प्रमाण पत्र भेजा किंतु तत्काल सहायता राशि जो 20,000 रूपये प्रति मजदूर के हिसाब से मिलने थे जो मजदूरों को नहीं दिए गए। साथ ही मजदूरों को उनकी बकाया मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है। बंधुआ मजदूरी प्रथा उन्मूलन अधिनियम 1976 तथा मानव तस्करी की धारा 370 के तहत तत्काल ही मालिक एवं ठेकेदार के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कर कानूनी कारवाही होनी चाहिए जो अभी तक नही हुई।
मुक्त हुए बंधुआ मजदूर करण सहरिया ने बताया की यदि बारां जिला प्रशासन से मुक्ति प्रमाण पत्र के साथ तत्काल सहायता राशि नही मिलने एवं बकाया मजदूरी का भुगतान न होने के कारण राजस्थान हाई कोर्ट की ओर न्याय की आस में रुख होगा और नेशनल कैंपेन कमिटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर इसमें सहयोग करेगा। करण का कहना है की उसके पत्नी एवं बच्चे को भी मुक्ति प्रमाण पत्र मिलना चाहिए जो अभी तक नही मिला है।
निर्मल गोराना अग्नि ने यह भी बताया की बंधुआ मजदूरों की पुनर्वास की योजना 2016 के अंतर्गत राजस्थान सरकार को पूरे प्रदेश में बंधुआ मजदूरों का सर्वे करने की आवश्यकता है। राजस्थान प्रान्त में काम कर रहे प्रवासी बंधुआ मजदूरों के कई मामले राजस्थान हाई कोर्ट में लंबित है जिसमे स्वयं निर्मल जनहित याचिकाकर्ता है। राजस्थान में प्रवासी मजदूरों का रजिस्ट्रेशन यदि सुप्रीम कोर्ट के प्रवासी मजदूरों पर सुओ मोटो मैटर में दिए गए आदेश के अनुसार हो रहा है तो करण एवं उसका परिवार वंचित कैसे रहा और इस प्रकार के लाखों परिवार आज भी खेतिहर मजदूर हैं जिन्हें श्रम पोर्टल पर पंजीकृत करने की आवश्यकता है किंतु प्रशासन की खेती हर मजदूरों तक पहुंच नहीं बन पा रही है इस संबंध में राजस्थान की सरकार को संज्ञान लेने की आवश्यकता है।
निर्मल गोराना अग्नि
कन्वीनर
नेशनल कैंपेन कमिटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ़ बौंडेड लेबर दिल्ली मोबाइल नंबर 9899823256
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