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Tuesday, February 1, 2022

2/01/2022 05:00:00 PM

 योग करें ,पर सावधानी से…… 

Dr. Niraj Yadav "Sahil"



"करें योग,रहे निरोग "   यह कहावत तो आपने सुनी ही होगी !  आजकल योग सार्वभौमिक या कहें सर्व सुलभ हो गया है ! जहाँ देखिये वहीँ आपको योग होता हुआ दिख जाएगा ! सुबह-शाम टीवी पर बाबाजी योग सिखाते मिल जाएंगे ! किताब की दुकानों पर योग से संबंधित किताबों के ढेर मिल जाएंगे ! आपके शहर के पार्क में भी योग करते लोगों के दर्शन आपको सहज ही हो जाएंगे !


कहने का आशय ,आज योग बहुत ही सुलभ हो गया है ! हर दूसरा आदमी योगाचार्य या योग गुरु  बन गया है ! और अपना ज्ञान (?) दूसरों को देने में लगा है ! है ना ?

हम भी वातावरण से प्रभावित होकर ,टीवी में देख कर या कोई किताब  पढ़कर योग करना शुरू कर देते हैं ! लेकिन होता यह है कि कभी कभी योग से बजाय फायदा होने के ,शरीर को नुक्सान भी हो सकता है ! योग अगर सही तरीके से किया जाए तो शरीर के लिए फायदेमंद है अन्यथा गलत तरीके से किया गया योग शरीर को हानि भी पहुँचा सकता है !

आज कुछ सावधानियों की बातें ,योग शुरू करने से पहले………… 


योग में सावधानियों से पहले संक्षेप में  योग की बात ,ठीक है ना ?


मैं ज्यादा विस्तार से इस बारे में बात नहीं करूँगा क्योंकि आप इस बारे में पढ़ चुके होंगे !


महर्षि पातञ्जलि ने अष्टांग योग का वर्णन किया है ,वे हैं --


1 यम  2 नियम 3 आसन  4 प्राणायाम  5 प्रत्याहार   6 धारणा  7 ध्यान  और 8 समाधि 


लेकिन आजकल हम सिर्फ आसन और प्राणायाम को ही योग समझ बेठे हैं !


योग केवल शरीर को ही साधने का विज्ञान नहीं है किसी नट कि तरह ! अपितु योग शरीर के साथ मन और अंतर्रात्मा को भी साधने कि कला है !


जीवात्मा को परमात्मा से मिलाने कि सीढ़ी है अष्टांग योग ! लेकिन ये बहुत गूढ़ विषय है ,जिस पर चर्चा फिर कभी !


आसन क्या हैं ?


"स्थिरसुखमासनम् " शरीर कि विभिन्न मुद्रायें जो अंग विशेष पर दवाव डालती हैं ,वो आसन कहलाती हैं !


वैसे तो 84 आसनो का वर्णन ज्यादा मिलता है और उनमे भी 32 आसन ही प्रमुख और ज्यादा जरुरी हैं ,शरीर सौष्ठव और स्वास्थ्य के लिए ,जिनकी चर्चा आगामी लेख में !


प्राणायाम क्या है ?


प्राण+आयाम 


प्राण है जीवनीय  शक्ति  और आयाम है उसका नियमन ! जीवनीय शक्ति के नियमन को ही प्राणायाम कहा है !


जीवनीय शक्ति का  नियमन होता है श्वास-प्रश्वास (inhale and exhale) के द्वारा ! आम भाषा में कहें तो सही तरीके से सांस लेने और छोड़ने कि क्रिया ही प्राणायाम है !


अब वापस मुद्दे पर आते हैं !

योग शुरू करने से पहले सावधानियां ---


अगर आप जिंदगी में पहली बार योग करना शुरू कर रहे हैं तो धीरे धीरे ,कम समय के लिए ,सरल आसनो के साथ शुरू कीजिये ! शरीर को तानना ,उसमे हल्का खिंचाव पैदा करना ,अपने को वार्मअप करना ,इन क्रियाओं को करने के बाद ही योग शुरू कीजिये !


शुरुआत सूक्ष्म व्यायामों से कीजिये !


योग करने से पहले अपनी क्षमता, उम्र, शारीरिक अवस्था ,कोई बिमारी (उच्चरक्तचाप, मधुमेह, हृदयरोग, स्पॉन्डिलाइटिस, स्लिपडिस्क, मोटापा, आदि ) का इतिहास ,आदि बातों का भी ध्यान रखिये !


होता  यह है कि टीवी पर बाबाजी या किसी प्रशिक्षित योग गुरु  को योग करते देख हम भी तुरंत दण्ड पैलने लग जाते हैं ! या सूर्य नमस्कार करना शुरू कर देते हैं ! है ना ?


फिर होता यह है कि हमारी किन्ही  मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है ! या टखने में मोच आ जाती है ,घुटने दुखने लगते हैं  और योग का अध्याय शुरू होने के पहले ही ख़तम हो जाता है !


योग में कभी भी अति न करें ! जबरदस्ती से किया गया योग आपकी सेहत को नुक्सान भी पहुंचा सकता है ! 


एक ऊंट और बकरी दोनों साथ साथ जा रहे थे ! रस्ते में नदी आयी ! ऊंट ने कहा ,पहले में जाता हूँ ,वो पानी में चल कर दूसरी पार निकल गया ! बकरी में चिल्ला कर पूछा ,-कितना पानी है ? ऊंट चिल्लाया ,आजाओ ,कमर तक ही है !


बकरी ने कहा भाई ,तुम्हारी तो कमर तक ही है ,लेकिन मैं तो पूरी ही डूब जाऊंगी ! मैं अपनी औकात और क्षमता  क्यों भूलूँ ?



कहा भी है ---


देखा-देखी करे योग ,छीजे काया बढे रोग !


योग एक जीवन शेली है न कि कोई काम जिसे नियत समय में पूरा करना है और काम ख़तम ! नहीं दोस्तों ,जैसे हम रोज श्वास लेते हैं ,रोज खाना खाते हैं ,रोज सोते हैं ! उसी तरह रोज थोडा सा योग भी हमारी जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए !


योग हमेशा खाली पेट किया जाता है !


योग का सबसे अच्छा समय प्रातः काल होता है ,सुबह नित्य कर्म से निवृत होकर योग करना चाहिए !


योग करने के तुरंत बाद कुछ खाना नहीं चाहिए !


योग करते ही नहाने भी नहीं जाना चाहिए ! 


योग हमेशा साफ़ ,खुले और स्वच्छ वातावरण में करना चाहिए !


दोस्तों, आज इतना ही 


डॉ नीरज यादव "साहिल" 

MD (Ayurved )

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